ऐसा है उज्जैन में covid-19 का असली चेहरा..

उज्जैन। वैश्विक महामारी के रूप में कोरोना वायरस ने विश्व भर में तबाही मचा रखी लेकिन कोविड 19 ने उज्जैन में अपने नाम के अनुरूप मौत का आंकड़ा 19% के आसपास बना लिया है। अभी भी उज्जैन के लोगों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है । ऐसा ना हो कि आने वाले समय में लापरवाही बरतने वालों को बड़ी  कीमत चुका कर भी पछतावा करना पड़े। देखिए विश्वभर में तबाही मचा रहे वायरस का उज्जैन में असली रूप।

कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्व भर में पोजिटिव मरीजों का आंकड़ा सभी सीमाएं पार कर रहा है । इसी के साथ मरने वालों की तादाद भी लगातार बढ़ती जा रही है । अगर पूरे विश्व की बात की जाए तो मरने वालों की संख्या लगभग 2,34,000 हो गई है। इसकी तुलना अगर मरीजों की संख्या से की जाए तो पूरे विश्व में मरने वालों का आंकड़ा मरीजों की तुलना में 2.1% है। इस प्रकार विश्व भर में 2% मरीज ही काल के ग्रास में समा रहे हैं। इसी प्रकार अगर भारत की बात की जाए तो यहां पर लगभग 34365 मामले सामने आ चुके हैं, इनमें से 1152 लोगों की मौत हो गई है। इस प्रकार भारत में आंकड़ा थोड़ा ज्यादा है। भारत में मरने वालों की तादाद 3.1% है। भोपाल, इंदौर सहित मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों की बात की जाए तो वहां मरने वालों का आंकड़ा 4, 5% से ऊपर नहीं है। ऐसी स्थिति में उज्जैन के आंकड़े पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां 147 मरीज सामने आ चुके हैं। इन मामलों के एवज में 27 लोगों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़ा 18% से ऊपर है। उज्जैन में कोरोना वायरस अपना असली रूप दिखा रखा है और यहां पर मरने वालों का प्रतिशत के 19 घूम रहा है।

ऐसी स्थिति में धार्मिक नगरी उज्जैन के लोगों को संभालने की बेहद जरूरत है। अभी भी लोग घरों से बाहर निकलकर अपने साथ साथ पूरे समाज के लिए खतरा बन रहे हैं। उज्जैन में लगातार रेड जोन में होने के बावजूद लाॅक डाउन के बीच मरीजों की तादाद बढ़ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब लाॅक डाउन खुलेगा उस समय क्या होगा ? उज्जैन के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग अपनी जान पर खेलकर लोगों के लिए हरदम लड़ाई लड़ रहा है । इस लड़ाई को तब ही सफल बनाया जा सकता है जब लोग अपने घरों में कैद रहकर लाॅक डाउन का पूरी तरह पालन करें। अभी भारत उस सूची में शामिल नहीं हुआ है जिसमें कोरोना वायरस के लाखों संक्रमित लोग उपचार के लिए परेशान हो रहे हैं, अगर अमेरिका जैसे महाशक्तिशाली देश की बात की जाए तो वहां 60,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसी बात को देखते हुए उज्जैन में गंभीरता से लाॅक डाउन का पालन करने की बेहद जरूरी जरूरत है।

सभी उम्र के लोगों का शिकार

कोरोना वायरस के बारे में यह कहा जा रहा था कि वह सबसे ज्यादा बुजुर्गों पर बुरा असर डालेगा लेकिन उज्जैन के आंकड़ों की बात की जाए तो यहां 40 साल से लेकर 70 साल के सभी लोगों पर कोरोना बुरा असर डाल रहा है। 45 और 47 साल के लोगों की भी उज्जैन में मौत हो रही है। ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए संयमित रहकर सरकारी गाइडलाइन का पालन करना ही होगा। उज्जैन संभाग के दूसरे जिलों की स्थिति लगातार सुधरती जा रही है । रतलाम रेड जोन से ऑरेंज में आ गया है ऐसे जिलों से उज्जैन को सबक लेने की जरूरत है।

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