मंत्रिमंडल विस्तार: सत्ता पर भारी संगठन !

भोपाल (विक्रम सिंह जाट)। कांग्रेस की कश्ती डूबने के पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता के साथ-साथ संगठन पर भी कब्जा कर रखा था। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी अपने पास ही रख रखी थी । इसके ठीक विपरीत भारतीय जनता पार्टी में ऐसे संगठक भी हैं जो सत्ता पर भारी है। देखिए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद विष्णु दत्त शर्मा की मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूरी भूमिका। 

राजनीति के क्षेत्र में विष्णु दत्त शर्मा को वीडी भाई साहब के नाम से जाना जाता है। वीडी भाई साहब ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत संघ के प्रचारक के रूप में की थी। उन्होंने 1993 से लेकर 2012 तक संघ के प्रचारक के साथ-साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और संगठन द्वारा दिए जाने वाले सभी दायित्वों को अपने अपने पूरी कर्मठता के साथ निभाया । इसके बाद उन्हें केंद्र की मोदी सरकार ने नेहरू युवा केंद्र का उपाध्यक्ष बनाकर केंद्रीय मंत्री का दर्जा दिया। इस दौरान उन्हें एक बंगला और अच्छी खासी सैलरी भी सरकार की ओर से दी जाने लगी लेकिन संगठन के लिए काम करने वाले विष्णु दत्त शर्मा को सत्ता का पद रास नहीं आया। उन्होंने अच्छे खासे वेतन और बड़े सरकारी बंगले के साथ साथ केंद्रीय मंत्री का दर्जा छोड़कर संगठन में काम करने की इच्छा जता दी। यही वजह रही कि विष्णु दत्त शर्मा केंद्रीय नेतृत्व के सिरमौर बन गए।

इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश का महामंत्री बनाया गया। विष्णु दत्त शर्मा ने महामंत्री बनने के बाद पूरी कर्मठता के साथ संगठन को मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और चुनाव भी जीत कर अपनी प्रतिभा सबके सामने दिखा दी। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश की जिम्मेदारी वी डी  शर्मा को सौंप दी । वीडी शर्मा वर्तमान में मंत्रिमंडल विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इस बात को लेकर भी जोर दिया गया है कि संगठन के लिए अधिक काम करने वाले जनता से सीधे जुड़े विधायकों को पहली प्राथमिकता से मंत्री बनाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा का उज्जैन से भी गहरा नाता रहा है। इसके अलावा उन्हें मध्य प्रदेश के अधिकांश विधायकों और पूर्व मंत्रियों की कार्यशैली पता है। यही वजह है कि इस बार छन छन का नाम ऊपर गए हैं।

स्वच्छ छवि और फ्रीहैंड..

अपने राजनीतिक जीवन में विष्णु दत्त शर्मा पर कभी भी किसी प्रकार की उंगली नहीं उठी है। वे हमेशा साफ छवि और निष्पक्ष रूप से कार्य करने वाले नेताओं में अव्वल दर्जे पर शुमार है । इसके अलावा फर्श से अर्श तक का सफर उन्होंने तय किया है। यही वजह है कि वे जमीनी कार्यकर्ताओं को तवज्जो देते हैं । बताया यह भी जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार में जो पांच मंत्री पूर्व में बनाए गए हैं , उनमें उनमें सिंधिया खेमे के मंत्रियों को छोड़ दिया जाए तो बाकी मंत्रियों में भी उनकी अच्छी खासी दखल अंदाजी रही है । बताया जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भी प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को फ्री हैंड दे रखा है। 

उपचुनावों की जिम्मेदारी..

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पर आने वाले उपचुनाव की भी बड़ी जिम्मेदारी है । यही वजह है कि वे ऐसे विधायकों को मंत्री बनवाना चाह रहे हैं जो आने वाले उपचुनाव में भी पार्टी के लिए सही निर्णय साबित हो सके। गौरतलब है कि चुनावों में राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार जरूर खड़ा करती है लेकिन चुनाव पूरा संगठन लगता है। वह कार्यकर्ता भी चुनाव  लड़ता है जिसे संगठन काम सौंपता है, इसलिए संगठन ही सत्ता की मूल पूंजी होती है, यह बात प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने वर्तमान परिस्थितियों में सभी को अच्छी तरह समझा दी है। 

सत्ता और संगठन के कुछ नाम में अंतर

राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सत्ता और संगठन के कुछ नामों में अंतर है यही वजह है कि अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूरी तरह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।  यह भी माना जा रहा है कि विभागों में भी सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि बीजेपी में हमेशा की तरह इस बार भी संगठन की ही चलने वाली है। संगठन जो तय करेगा उसी विधायक को मंत्री बनाया जाएगा, जबकि सत्ता में बैठे नेताओं को भी तवज्जो दी जाएगी। 

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